रानीखेत की जानकारी

रानीखेत की जानकारी, ranikhet kaise jaye

में आपका दोस्त मनोज कुमार एक बार आपके सामने लाया हु घूमने की एक ऐसी जंगह जिसे दिख आपका मन खिल उठेगा. जी हां में बात कर रहा हु रानीखेत की. यहाँ की घटिया और ऊँचे पहाड़ आपका मन मोह लेंगे. इसकी में आपको फुल गारंटी देता हु. आप यहाँ पर अपने परिवार के साथ या फिर अपने जीवन साथी के साथ भी घूमने के लिए आ सकते है. यहाँ पर बर्फ से ढकी हुयी मध्य हिमालयी पहाड़ियां देखने का आनंद भी लिया जा सकता है.

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है रानीखेत हिल स्टेशन, जो समुद्र तल से 1824 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक छोटा सा खूबसूरत शहर है. कुमाऊं रेजिमेंट का मुख्यालय रानीखेत में होने के कारण यहाँ चारों ओर सफाई पर ख़ास ध्यान दिया जाता है. एक किवदंती के अनुसार रानीखेत का नाम रानी पद्मिनी के कारण पड़ा. रानी पद्मिनी राजा सुखदेव की पत्नी थीं, जो वहां के राज्य के शासक थे. रानीखेत की सुंदरता देख राजा और रानी बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने वहीं रहने का फैसला कर किया. रानीखेत के कई इलाकों पर कुमांऊनी का शासन था पर बाद में यह ब्रिटिश शासकों के हाथ में चला गया.

अंग्रेजों ने रानीखेत को छुट्टियों में मौज-मस्ती के लिए हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया और 1869 में यहां कई छावनियां बनवाईं जो अब ‘कुमांऊ रेजीमेंटल सेंटर’ है. इस पूरे क्षेत्र की मोहक सुंदरता का अनुमान कभी नीदरलैण्ड के राजदूत रहे वान पैलेन्ट के इस कथन से लगाया जा सकता है- जिसने रानीखेत को नहीं देखा, उसने भारत को नहीं देखा. कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष पहले कोई रानी अपनी यात्रा पर निकली हुई थीं. इस क्षेत्र से गुजरते समय वह यहां के प्राकृतिक सौंदर्य से मोहित होकर रात्रि-विश्राम के लिए रुकीं.

बाद में उन्हें यह स्थान इतना अच्छा लगा कि उन्होंने यहीं पर अपना स्थायी निवास बना लिया. चूंकि तब इस स्थान पर छोटे-छोटे खेत थे, इसलिए इस स्थान का नाम ‘रानीखेत’ पड़ गया. अंग्रेज़ों के शासनकाल में सैनिकों की छावनी के लिए इस क्षेत्र का विकास किया गया. क्योंकि रानीखेत कुमाऊं रेजिमेन्ट का मुख्यालय है, इसलिए यह पूरा क्षेत्र काफ़ी साफ-सुथरा रहता है. यहां का बाज़ार तो अद्भुत है. पहाड़ के उतार (यानी खड़ी चढ़ाई) पर बना हुआ. इसलिए इसे ‘खड़ा बाज़ार’ कहा जाता है.

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रानीखेत का मौसम Ranikhet ka mausam

रानीखेत में गर्मी के दिनों में मौसम सामान्य, जुलाई से लेकर सितम्बर तक का मौसम बरसात का और फिर नवंबर से फरवरी तक बर्फबारी और ठंड वाला होता है. रानीखेत का हर मौसम घूमने का आनंद देता है. वैसे तो रानीखेत साल में कभी भी जा सकते हैं लेकिन सबसे अच्छा समय है मार्च से जून तक का होता है. अगर आप ठंड में जाना चाहें तो सितम्बर से नवंबर के बीच जाएं, जब वहां का मौसम सबसे बढ़िया होता है.

रानीखेत की भाषाएं Ranikhet ki language

1. कुमांऊनी

2. हिन्दी

रानीखेत में क्या क्या देखे Ranikhet me kya kya dekhe

1. माँ कलिका मंदिर Maa kali temple

माँ कलिका मंदिर उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले के प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थल रानीखेत में स्थित है. घने वृक्षों के मध्य एक छोटी से पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह एक प्रसिद्ध मंदिर है. प्रवेश द्वार पर ही कुछ दुकानदार अपनी अस्थाई दुकान लगाये हुए स्थानीय फल आडू, नख आदि बेचते हुए मिलते हैं. इस द्वार से माँ कालिका का मंदिर तक जाने के लिए सीढ़िया बनी हुई हैं.

इन सीढ़ियों से घने वृक्षों के मध्य से होते हुए मंदिर पहुँचा जा सकता है. तेज हवा चलने के कारण सीढ़ियों के दोनो तरफ के पेड़-पौधे जोर-जोर से आवाज़ करते हैं तो बहुत ही अच्छा लगता है. रानीखेत से 6 किलोमीटर की दूरी पर गोल्फ़ का विशाल मैदान है जो इस मंदिर के समीप ही है.

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2. गोल्फ़ कोर्स Golf course

रानीखेत से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर गोल्फ़ का विशाल मैदान है जो गोल्फ़ कोर्स के नाम से प्रसिद्ध है. रानीखेत में शहर से चीड़ के घने जंगल के बीच (6000 फुट की ऊंचाई पर) उपत नामक स्थान पर एक विश्व प्रसिद्ध गोल्फ़ मैदान है. यहां प्राय: फ़िल्मों की शूटिंग होती रहती हैं. कोमल हरी घास का यह सुंदर मैदान नौ छेदों वाला हैं. ऐसा मैदान बहुत कम देखने को मिलता है.

यहां खिलाड़ियों के रहने के लिए एक सुंदर बंगला बना हुआ है, जहां से दूर तक फैले हिमाच्छादित पर्वतों को देखना बहुत ही अच्छा लगता हैं. प्राकृतिक सुषमा के कारण यह स्थान पिकनिक और ट्रैकिंग के लिए काफ़ी उपयुक्त है. फूलों के सुंदर बाग के कारण यहां की रमणीयता और बढ़ जाती हैं.

3. चौबटिया गार्डन Chobtiya garden

चौबटिया गार्डन उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले के प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थल रानीखेत में स्थित है. रानीखेत से 10 किलोमीटर दूर इस स्थान पर एशिया का सबसे बड़ा फलों का बगीचा हैं. यहां दर्जनों तरह के फलों के पेड़ हैं, जिन्हें देखकर पर्यटक गदगद हो उठते हैं. यहां सरकार द्वारा स्थापित विशाल फल संरक्षण केंद्र भी देखने लायक हैं. यह स्थान मुख्य रूप से फलोद्यान, बग़ीचों और सरकारी फल अनुसंधान केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है.

यहां पिकनिक का आनंद लिया जा सकता है. इस स्थान से विस्तृत हिमालय, नंदादेवी, त्रिशूल, नंदाघुन्टी और नीलकण्ठ के विहंगम दृश्य देखे जा सकते हैं. 265 एकड़ क्षेत्र में फैला यहां का होर्टीकल्चर गार्डन भारत के विशालतम होर्टीकल्चर गार्डन्स में एक है. इस गार्डन में 36 किस्म के सेब उगाए जाते हैं जिनमें चार किस्मों का निर्यात भी किया जाता है.

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4. बिन्सर महादेव मंदिर Binsar mahadev temple

बिन्सर महादेव मंदिर रानीखेत (अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड) से 19 किमी की दूरी पर स्थित है. बिन्सर महादेव मंदिर समुद्र तल से 2480 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र का प्रमुख मंदिर है. मंदिर चारों तरफ से घने देवदार के वनों से घिरा हुआ है. मंदिर के गर्भगृह में गणेश, हरगौरी और महेशमर्दिनी की प्रतिमा स्थापित है. महेशमर्दिनी की प्रतिमा पर मुद्रित नागरी लिपि मंदिर का संबंध नौवीं शताब्दी से जोड़ती है.

इस मंदिर को राजा पीथू ने अपने पिता बिन्दू की याद में बनवाया था. इसीलिए मंदिर को बिन्देश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. यहां हर साल जून के महीने में बैकुंड चतुर्दशी के अवसर पर मेला लगता है. मेले में महिलाएं पूरी रात अपने हाथ में दिए लेकर सन्तान प्राप्ति के लिए आराधना करती हैं.

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5. कटारमल सूर्य मन्दिर Katarmal sun temple

कटारमल सूर्य मन्दिर उत्तराखण्ड में अल्मोड़ा के ‘कटारमल’ नामक स्थान पर स्थित है. इस कारण इसे ‘कटारमल सूर्य मंदिर’ कहा जाता है. यह सूर्य मन्दिर न सिर्फ़ समूचे कुमाऊँ मंडल का सबसे विशाल, ऊँचा और अनूठा मन्दिर है, बल्कि उड़ीसा के ‘कोणार्क सूर्य मन्दिर’ के बाद एकमात्र प्राचीन सूर्य मन्दिर भी है. ‘भारतीय पुरातत्त्व विभाग’ द्वारा इस मन्दिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया जा चुका है. सूर्य देव प्रधान देवताओं की श्रेणी में आते हैं. वे समस्त सृष्टि के आधार स्वरूप हैं. संपूर्ण भारत में भगवान सूर्य देव की पूजा, अराधना बहुत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ की जाती है.

6. हेड़ाखान मंदिर Hedakhan temple

हेड़ाखान मंदिर उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थल रानीखेत के अंतर्गत ही आता हैं और रानीखेत के सड़क मार्ग से कुछ हटकर NH-87 मार्ग के पास ही हैं. यह सफ़ेद संगमरमर से निर्मित भव्य मंदिर रानीखेत से क़रीब चार या पांच किलोमीटर दूर हिमालय की सुरम्य वादियों में एक रमणीक पहाड़ी पर स्थित हैं. इस मंदिर से हिमालय का बड़ा ही शानदार नज़ारा नजर आता हैं, यदि आकाश साफ़ हो और धुंध न हो तो सैकड़ों किलोमीटर दूर हिमालय की बर्फ से ढकी मुख्य चोटियाँ जैसे पंचचुली, नंदादेवी, चौखम्बा आदि नजर आती हैं. समुद्र तल से इस मंदिर की ऊँचाई लगभग 1835 मीटर हैं.

7. द्वाराहाट Dwarahaat

द्वाराहाट अथवा ‘द्वारहाट’ रानीखेत तहसील, अल्मोड़ा ज़िला, उत्तराखण्ड का एक प्राचीन स्थान है. यह रानीखेत से 13 मील (लगभग 20.8 कि.मी.) की दूरी पर स्थित है. 8वीं से 13वीं शती तक के अनेक मंदिरों के अवशेष यहाँ से मिले हैं.

8. झूला देवी मंदिर Jhula devi temple

दुर्गा माता को समर्पित है झूला देवी मंदिर. ये मंदिर मनोकामना पूरी करने के लिए जाना जाता है जहाँ मनोकामना पूरी होने पर घंटी चढ़ाने की मान्यता है. यहाँ से कुछ कदम की दूरी पर एक राम मंदिर भी है.

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तो दोस्तों आपको हमारे द्वारा बताई गयी रानीखेत की ये सारी जानकारी केसी लगी. हम आशा करते है की आप जब भी रानीखेत घूमने के लिए जायेगे. तो आपको ये जानकारी बहुत फायदा देगी. अगर आपको मेरी ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया करके इस पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर करे. धन्यवाद्

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