माउंट अबू की जानकारी

माउंट अबू की जानकारी, mount abu me kya hai

हेलो दोस्तों में आपका दोस्त मनोज कुमार एक बार फिर से आपके सामने पेश हुआ हु, एक रोमांचक जंगह लेकर , जिसका नाम है “माउंट अबू”. माउंट अबू राजस्थान का ऐस हील स्टेशन है जहा पर सभी लोग जाना चाहते है. में लास्ट ईयर यहाँ पर घूमने के लिए गया हुआ था, लेकिन मेरे पास सम्पूर्ण जानकारी का आभाव था. लेकिन आज में इसके बारे में बहुत कुछ जान चूका हु और अब आप लोगो को भी बताने जा रहा हु. तो दोस्तों अब शुरू करते है अपनी माउंट अबू की यात्रा. समुद्र तल से 1220 मीटर की ऊँचाई पर स्थित माउंट आबू को राजस्थान का स्वर्ग भी माना जाता है. नीलगिरि की पहाड़ियों पर बसे माउंट आबू की भौगोलिक स्थित और वातावरण राजस्थान के अन्य शहरों से भिन्न व मनोरम है.

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यह स्थान राज्य के अन्य हिस्सों की तरह गर्म नहीं है. माउंट आबू हिन्दू और जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है. यहाँ का ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक ख़ूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है. माउंट आबू के सांस्कृतिक जीवन की झलक त्योहारों और उत्सवों पर ही देखने को मिलती है. प्रतिवर्ष जून में होने वाले समर फेस्टीवल यानी ग्रीष्म महोत्सव में तो यहाँ जैसे पूरा राजस्थान ही सिमट आता है. रंग-बिरंगी परंपरागत वेशभूषा में आए लोक कलाकारों द्वारा लोकनृत्य और संगीत की रंगारंग झांकी प्रस्तुत की जाती है. घूमर, गैर और धाप जैसे लोक नृत्यों के साथ डांडिया नृत्य देख सैलानी झूम उठते हैं. तीन दिन चलने वाले इस महोत्सव के दौरान नक्की झील में बोट रेस का आयोजन भी किया जाता है. शामे कव्वाली और आतिशबाजी इस फेस्टिवल का ख़ास हिस्सा हैं.

पश्चिमी भारत में राजस्थान राज्य की अरवली रेंज में माउंट आबू सर्वोच्च शिखर है यह सिरोही जिले में स्थित है पहाड़ 9 किमी चौड़ी तक 22 किमी लंबा एक विशिष्ट चट्टानी पठार का निर्माण करता है. पर्वत पर सर्वोच्च शिखर गुरु शिखर 1722 में है. माउंट आबू, पश्चिमी राजस्थान में गुजरात की सीमाओं के निकट स्थित है. यह उदयपुर से लगभग 185 किमी, अहमदाबाद से 221 किमी, जोधपुर से 264 किमी, जयपुर से 500 किमी और दिल्ली से 765 किलोमीटर दूर स्थित है. पूरे वर्ष पूरे शहर में सुखद माहौल का अनुभव है. उनकी गर्मी का तापमान 23 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है और सर्दियों में यह 11 से 28 डिग्री सी के बीच होता है. सर्दियों में गर्म कपड़े की आवश्यकता होती है. हिल स्टेशन 65-177 सीएमएस की औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करता है.

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माउंट आबू का मौसम Weather of mount abu rajasthan

माउंट आबू का मौसम बहुत ही सुहावना है . सामान्यत: सर्दियों में यहा का औसत तापमान 16 डिग्री सेल्सियस से 22 डिग्री सेल्सियस तक रहता है लेकिन रात के समय यह तापमान घटकर 4 से 12 डिग्री सेल्सियस तक रह जाता है . कभी कभी माउंट आबू का तापमान भारी सर्दियों में शून्य से 3 डिग्री नीचे तक पहुच जाता है . हालांकि गर्मियों में कितनी भी गर्मी क्यों न हो , यहा का तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के पार नही पहुचता जबकि बरसात में भी कई बार तापमान कम हो जाने से लोग ठंड का आभास करने लगते है. यही कारण है कि तो गर्मी के मौसम में जब पूरा राजस्थान और गुजरात तपता है तो माउंट आबू ही ऐसी जगह है जहा सुहावने मौसम एवं हरे भरे वातावरण के कारण इसे धरती का स्वर्ग भी कहा जाता है . साथ ही ब्रह्मा कुमारियो का मुख्यालय होने से एवं परमात्मा से साक्षात अनुभूति होने से स्वर्ग सा सुखद आनन्द प्राप्त होता है जिस यहा आने वाले कभी नही भूल पाते है .

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माउंट अबू में घूमने की जंगह Mount abu me ghumne ki jagah rajasthan

माउंट आबू में अनेक पर्यटन स्थल हैं. माउंट आबू हिन्दू और जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है. माउंट आबू के ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक ख़ूबसूरती पर्यटको को अपनी ओर खींचती है. माउंट आबू कों दिलवाड़ा के मंदिरों के अलावा अन्य कई ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है. वैसे तो साल भर पर्यटनों का जमावड़ा यहां रहता हैं. लेकिन गर्मियों के मौसम में पर्यटकों की संख्या में इजाफ़ा हो जाता है.

गुरु शिखर, सनसेट प्वाइंट, टोड रॉक, अचलगढ़ क़िला और नक्की झील प्रमुख आकर्षणों में से हैं. यहां की साल भर रहने वाली हरियाली पर्यटकों को ख़ासी भाती है. इसका निर्माण झील के आसपास हुआ है और चारों ओर से यह पर्वतीय क्षेत्र जंगलों से घिरा है.

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1. दिलवारा दिलवाड़ा का जैन मन्दिर

राजस्थान का स्वर्ग माउंट आबू (Mount Abu) यु तो अपनी प्राकृतिक घटा और अद्वितीय सौन्दर्य के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है लेकिन यह सतना प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के साथ साथ दिलवाडा के अनुपम जैन मन्दिरों के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है . सफेद संगमर मर से शिल्पकला के बेजोड़ नमूने के रूप में विश्व प्रसिद्ध 5 जैन मन्दिरों के इस समूह को देखने के लिए माउंट आबू से करीब 3 किमी दूर दिलवाड़ा जाते है . इस मन्दिर में कैमरा एवं मोबाइल ले जाना पुरी तरह प्रतिबंधित है . इन मन्दिरों का निर्माण सन 1231 में तत्कालीन राज्यमंत्री रहे दो भाइयो ने कराया था.

संगमर मर के पत्थर पर बारीक नक्काशी और भगवान महावीर स्वामी की बेशकीमती प्रतिमाओं से सुसज्जित मन्दिरों को देखकर लगता है जैसे उस काल में पहुच गये हो जिस काल में मन्दिरों का निर्माण हुआ था . इन मन्दिरों में छत की भी नक्काशी की गयी है . छत पर लटकता झूमर ,नृत्य करती नृत्यांगनाओ की प्रतिमाओ ,फुल पत्तो से सजी बेल ,संगमरमर के पत्थर पर इस प्रकार तराशी गयी है कि पत्थर खुद बोलने को आतुर लगे रहते है . यही अचलगढ़ के जैन तीर्थ में 1444 मन की पंचधातु से बनी प्रतिमा देखकर पर्यटक सम्मोहित हो जाते है .

2. नक्की झील

अपने अद्वितीय सौन्दर्य एवं प्राकृतिक छटा से सबका मन मोह लेने वाली माउंट आबू की प्रसिद्ध नक्की झील देखे बिना माउंट आबू की यात्रा अधूरी मानी जाती है . चारो ओर से हरे भरे वृक्षों की कतारों और ऊँची पहाडियों से घिरी नयनाभिराम यह नक्की झील अपने अंदर का एक अनूठा इतिहास समेटे हुए है . कहा जाता है कि बालम रसिया नामक एक सिद्ध पुरुष ने अपने हाथ के नाखुनो से धरती खोदकर यह झील बनाई थी . नाखुनो से खुदाई कर बनी इस झील का नामकरण इसी कारण नक्की झील के रूप में हुआ.

इस झील में नौका विहार का अपना ही आनन्द है . पर्यटकों को लुभाने के लिए इस झील में नौकाये कतारबद्ध होकर वहा खडी रहती है और तय किया हुआ किराया लेकर नाविक इस झील की सैर कराते है . लगता है स्वर्गलोक पर नौका विहार का रसानन्द मिल रहा हो . इस झील के दक्षिण पश्चिम में के ऊँची पहाड़ी पर मेंढक के आकार में झांकती एक शिला प्राकृतिक रूप में एक करिश्मा नजर आती है जिसे रॉक रोड कहा जाता है .

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3. गुरु शिकार के बारे में जानकारी

गुरु शिकर माउंट अबू के लगभग 15 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित अरवल्ली रेंज का सबसे ऊंचा शिखर है. यह एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थस्थल है, जो आपके माउंट आबू टूर पर जाकर लायक है.

4. गौमुख टेम्पल के बारे में जानकारी

हिंदुओं द्वारा पूजा के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है, गौमुख मंदिर उनके गौरव का प्रतीक है. अपने जीवन में कम से कम एक बार इस जगह का दौरा कई हिंदू भक्तों की आकांक्षा है. इसलिए, यदि आप माउंट आबू में जाते हैं तो गौमुख मंदिर की यात्रा आवश्यक है. गौमुख का नाम मंदिर के सबसे ऊपरी हिस्से में एक पत्थर की नक्काशी से लिया गया है, जो एक गाव के मुंह (मुख) को एक टैंक में पानी के प्रवाह का प्रवाह जारी करने को दर्शाता है. आप मंदिर और उसके चारों ओर से पैदल चलने वाले पैदल चलने का आनंद ले सकते हैं. गौमुख मंदिर धार्मिक तीर्थयात्रा और ध्यान के लिए भी लोकप्रिय है.

5. देवी टेम्पल के बारे में जानकारी

माउंट आबू में अधार देवी मंदिर की विशाल वेदी राजस्थान की समृद्ध वास्तुशिल्प पृष्ठभूमि की पुष्टि है. प्राचार्य समुदाय के तीन किलोमीटर उत्तर में गुफा में स्थित, अधार देवी मंदिर, दुर्गा को समर्पित है जो क्षमता, आत्मा और उत्साह के मूल स्रोत के रूप में देखा जाता है, क्षेत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक थीमयुक्त पर्यटन स्थलों में से एक है. मंदिर पहाड़ में कटौती 365 कदम बढ़ते हुए और फिर गुफा में एक छोटे से अंतर में clambering द्वारा पहुंचे है

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6. सनसेट पॉइंट के बारे में जानकारी

दिन के उत्तरार्ध में, एक उत्सव के माहौल के बीच में, कई लोग इस क्षेत्र के पास दक्षिण पश्चिम नकी झील में पाए जाते हैं जो सूरज के नीचे जाने के एक सुंदर दृश्य पेश करता है. सुंदर पहाड़ियों, शांत वातावरण और आकर्षक मौसम पर्यटकों के बीच यह पसंदीदा स्थान बनाते हैं. आप क्युरीओज़, उत्कीर्ण संगमरमर के बस्ट्स, चंदन की मूर्तियां, लकड़ी के खिलौने और अन्य गहने उठा सकते हैं, जो कि क्षेत्र कोड़ने वाले विभिन्न उपहार संगठनों से या कई भोजन स्टालों से स्थानीय व्यंजनों का उपयोग कर सकते हैं.

7. श्री रघुनाथजी टेम्पल के बारे में जानकारी

भगवान विष्णु के प्रति समर्पित, जिन्होंने अपने विश्वासियों को जीवन की कई विपत्तियों से बचाने के लिए रघुनाथ जी के रूप में व्यक्त किया, नकी झील के नजदीक श्री रघुनाथजी मंदिर, एक विशेष रेफरल के योग्य है. मंदिर में आयोजित श्री रघुनाथजी की मूर्ति बहुत आकर्षक है. 14 वीं शताब्दी में इस मंदिर को वापस बनाया गया माना जाता है, सौ साल पुराने मेवार्ड सौंदर्यशास्त्र की समृद्ध पृष्ठभूमि का हिस्सा बनने की स्थिति का आनंद उठाता है. वैष्णवों के लिए दुनिया के सबसे दिव्य स्थानों में से एक, यह माउंट आबू में सबसे अधिक जाने वाले मंदिरों में से एक है.

8. म्यूजियम और आर्ट गैलरी के बारे में जानकारी

पहाड़ी स्टेशन की संग्रहालय और आर्ट गैलरी, राज भवन नामक एक इमारत में रखी गई है, उन लोगों के लिए जरूरी है, जो अतीत में खुदाई करना और किसी क्षेत्र की पृष्ठभूमि की जांच करना चाहते हैं. आप यहां देवदासी और नर्तकिस के नाजुक पुतलों को देख सकते हैं, जो 18 वीं शताब्दी से संबंधित दुर्लभ प्राचीन खुदाई का एक हिस्सा हैं, जैन कांस्य का नक्काशी, हाथी का काम, फर्नीचर, पुराने डिजाइन, कला, पैतृक झोपड़ी, सजावट और हथियार.

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9. अचलेश्वर महादेव मन्दिर

जैन मन्दिरों की श्रुखला देखने के बाद अचलगढ़ के उस मन्दाकिनी कुंड में जाते है जहा तीन पाड़ा यानि भैसा रुपया राक्षसों की प्रतिमाये लगी है . बताया जाता है कि ये राक्षस इस क्षेत्र में तपस्या कर रहे ऋषियों ,महात्माओ और संतो को बहुत प्रेषण करते थे . ऋषि महात्मा पूजा पाठ एवं यज्ञ इत्यादि के लिए जो घी अपनी कुटिया में रखते थे राक्षस वह घी जबरन पी जाते थे . राक्षसो की इस हरकत से परेशान ऋषियों ने आबू के राजा आदिपाल से शिकायत की तो बताते है कि उन्होंने तीर से तीनो पाड़ा रूपी राक्षसो का संहार कर दिया था.

इस घटना की याद में मन्दाकिनी कुंड बना हुआ है . यह कुंड 900 फुट लम्बा एवं 240 फुट चौड़ा है जिसके किनारे पर इन तीनो पाडो (भैसों) की विशालकाय प्रतिमाये स्थापित है जिसे देखने के लिए देश विदेश से पर्यटक यहा आते है . इस कुंड से थोड़ी ही दूर पर स्थित है अचलेश्वर महादेव मन्दिर . करीब 2500 साल पुराने इस मन्दिर में भगवान शिव की शिवलिंग पिंडी प्रतिष्टित नही बल्कि शिवलिंग का स्थान पूर्णत: खाली है उअर यहाँ शिवलिंग के स्थान पर भगवान शिव के पैर के अंगूठे की ही पूजा होती है . नक्काशी एवं वास्तुकला के बेजोड़ नमूने के लिए प्रसिद्ध इस मन्दिर के द्वार पर दोनों और विशालकाय प्रतिमाये लगी है तो विराट स्वरूप में पांच धातुओ के मिश्रण से बनी नन्दी प्रतिमा पर मन्दिर का विशेष आकर्षण है.

कहा जाता है इस मन्दिर में माँगी गयी मुराद भगवान भगवान शिव सहजता के साथ पुरी कर देते है . इस मन्दिर के खजाने को लुटने के लिए अहमदाबाद के बादशाह मोहम्मद बेगडा ने मन्दिर पर आक्रमण किया था . बादशाह के द्वारा मन्दिर पर कराए गये प्रहारों के चिन्ह आज भी यहा नजर आते है .सन 1979 में सिरोही रियासत के युवराज ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार किया और संगमरमर से मन्दिर के बाहरी आवरण की साज सज्जा की . इस मन्दिर की परिक्रमा क्र श्रुधालू स्वयं को धन्य समझते है .

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माउंट अबू तक कैसे पहुंचे Mount abu tak kese pahuche

1. हवाईजहाज By air

सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा माउंट अबू से 185 किमी दूर उदयपुर है. हालांकि, 221 किलोमीटर की दूरी पर अहमदाबाद में बेहतर कनेक्टिविटी और देश के अन्य क्षेत्रों में रोज़मर्रा की उड़ानें हैं. अहमदाबाद और उदयपुर दोनों से आप टैक्सी को पहले से बुक कर सकते हैं.

2. रेल द्वारा By train

अबू रोड सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है जो मुख्य शहर से सिर्फ 28 किमी दूर है, जो रेलवे मार्गों से नई दिल्ली, अहमदाबाद, जयपुर और मुंबई से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. अबू रोड से आप सरकारी परिवहन सहायता या टैक्सियों को साझा करने और निजी आधार दोनों के लिए चुन सकते हैं.

3. बस से By bus

माउंट आबू देश के प्रमुख महानगरों के साथ सड़क से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है; निकटतम राष्ट्रीय फ्रीवे नंबर के साथ 14 शहर से सिर्फ 24 किमी की दूरी पर है.

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दोस्तों आपको मांउट अबू की ये जानकारी कैसी लगी, और आपको मेरे द्वारा बताये गए माउंट अबू के दार्शनिक स्थलों की जानकारी कैसी लगी, इसके बारे में भी ही हमे जरूर बताये. साथ ही आप हमारी इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना ना भूले. धन्यवाद्

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