तीर्थ यात्रा करनी है तो जाएं बद्रीनाथ धाम

तीर्थ यात्रा करनी है तो जाएं बद्रीनाथ धाम, badrinath mein ghumne ki jagah

हेलो दोस्तों आज में आपको जानकारी देने जा रहा हु बद्रीनाथ धाम की. में यहाँ पर 2016 में गया था. उस समय मुझे पूरी जानकारी नहीं थी. लेकिन आज में इसके बारे में आपको सम्पूर्ण जानकारी देने जा रहा हु. ताकि जब भी आप बद्रीनाथ धाम घूमने जाएं, तो आपको किसी भी प्रकार की कोई भी समस्या ना हो. प्रत्येक हिन्दू की यह कामना होती है कि वह बद्रीनाथ का दर्शन एक बार अवश्य ही करे. यहाँ पर शीत के कारण अलकनन्दा में स्नान करना अत्यन्त ही कठिन है. अलकनन्दा के तो दर्शन ही किए जाते हैं. यात्री तप्तकुण्ड में स्नान करते हैं.

यहाँ वनतुलसी की माला, चने की कच्ची दाल, गिरी का गोला और मिश्री आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है.यहाँ बद्रीनाथ के पुजारी शंकराचार्य के वंशज होते हैं जो रावल कहलाते हैं. यह जब तक रावल के पद पर रहते हैं इन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है. रावल के लिए स्त्रियों का स्पर्श भी पाप माना जाता है. पुराणों में बताया गया है कि बद्रीनाथ में हर युग में बड़ा परिवर्तन होता है. सतयुग तक यहां पर हर व्यक्तिको भगवान विष्णु के साक्षात दर्शन हुआ करते थे. इसलिए शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य को जीवन में कम से कम एक बार बद्रीनाथ के दर्शन जरूर करना चाहिए. कहा जाता है कि यहाँ कभी बेरों के वृक्षों की बहुत संख्या थी इसलिए इसका नाम ‘बदरीवन’ पड़ गया.

इस नगर को लेकर यह भी कहा जाता है की ‘बद्रीनाथ’ का निर्माण भगवान महादेव ने अपनी पत्नी माता पार्वती के लिए करवाया था. लेकिन इस नगर को भगवान महादेव ने भगवान विष्णु को भेंट में दे दी थी. इसलिए यह नगरी ‘भगवान विष्णु की नगरी’ है. इस मंदिर में आप भगवन विष्णु के साथ माता लक्ष्मी, कुबेर जी, उद्धव जी, गरुड़ जी, नारद जी आदि की मूर्तियां देख सकते हैं. हर साल हज़ारों की तादाद में भक्तों की भीड़ उमड़ती है सब ऊँची नीची पहाड़ियों को पार कर भगवान के दर्शन करने आते हैं. यहाँ से आप सूर्योदय और सूर्यास्त का अद्भुत नज़ारा कर सकते हैं.

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बद्रीनाथ कैसे जाएँ Badrinath kese jaye

सड़क मार्ग द्वारा By road

समीपवर्ती प्रदेशों से ऋषिकेश के लिए सीधी बस सेवायें उपलब्ध हैं. ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक पहाड़ी रास्ता है. ऋषिकेश से बस या अपने वाहन द्वारा सुबह चलकर आप शाम तक यहाँ पहुँच सकते हैं.

दो पर्वतों के बीच बसा

बद्रीनाथ धाम दो पर्वतों के बीच बसा है जिसे नर नारायण पर्वत कहा जाता है. कहते हैं यहां पर भगवान विष्णु के अंश नर और नारायण ने तपस्या की थी. नर अगले जन्म में अर्जुन और नारायण श्री कृष्ण हुए.

बद्रीनाथ में घूमने वाली जंगह Badrinath me ghumne wali jangha

1. बद्रीनाथ मंदिर Badrinath temple

बद्रीनारायण के नाम से जाना जाने वाला विशाल आस्थाओं से सराबोर बद्रीनाथ मंदिर मोक्ष प्राप्ति का मुख्य द्वार है. यहाँ चार धामों में से एक धाम भी है.

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2. भीम पुल Bheem pul

विशाल चट्टान द्वारा प्राकृतिक रूप से बना पुल भीम पुल कहलाता है जो कि सरस्वती नदी के ऊपर से निकला है. यहाँ गणेश गुफा, व्यास गुफा आदि भी दर्शनीय है. पर्यटक यहाँ इस पुल के साथ साथ इन गुफाओं के भी दर्शन करने आते हैं.

3. वसुधरा Vasudhra

वसुधरा झरना बेहद लुभावना व मनोरम दृश्यों वाला है. हालांकि इस झरने तक पहुँचने वाला रास्ता बेहद कठिन व साहसपूर्ण है यहाँ तक आना किसी जोखिम को उठाने जैसा है. परन्तु यहाँ का वातावरण पर्यटकों को यहाँ आने से रोक नहीं पाता है.

4. सतोपंत झील Satopant jhil

सतोपंत झील तक़रीबन 1 किलोमीटर के दायरे में फैली हुई बेहद लुभावनी झील है. हालांकि यहाँ तक पहुँचने के लिए पर्यटकों को पैदल ही यात्रा करनी पड़ती है क्यूंकि यहाँ यहाँ तक आने के लिए गाड़ी घोड़ों की व्यवस्था नहीं है.

5. खिरौं घाटी Khiro ghati

खिरौं घाटी का सौंदर्य इतना निखरा हुआ रहता है की यहाँ तक आने के लिए पर्यटक खतरनाक रास्तों की भी परवाह नहीं करते हैं. हालांकि यहाँ तक बस पैदल ही आया जा सकता है. जो पर्यटक ट्रेकिंग के शौक़ीन हैं वह यहाँ अवश्य आएं.

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6. कागभुशुंडि ताल Kagbhushundi taal

कागभुशुंडि ताल तक पहुँचने के लिए भी पैदल ही यात्रा करनी पड़ती है क्यूंकि यहाँ पर भी कोई साधन उपलब्ध नहीं है. यहाँ ट्रेकिंग करने का अपना अलग ही मज़ा है.

7. पांडुकेश्वर Pandukeshwar

कहा जाता है कि पांडुकेश्वर महाभारत कालीन से जुड़ा हुआ है इसी वजह से इस स्थान का अपना अलग ऐतिहासिक महत्त्व है. यहीं पास में दो मंदिर भी हैं जो कलात्मक शैली के अद्भुत धरोहर हैं.

बद्रीनाथ के दर्शनीय स्थल Badrinath ke darshniya place

1. अलकनंदा के तट पर स्थित तप्त-कुंड, धार्मिक अनुष्टानों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक समतल, चबूतरा- ब्रह्म कपाल, पौराणिक कथाओं में उल्लिखित सांप (साँपों का जोड़ा), शेषनाग की कथित छाप वाला एक शिलाखंड-शेषनेत्र.

2. चरणपादुका, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह भगवान विष्णु के पैरों के निशान हैं (यहीं भगवान विष्णु ने बालरूप में अवतरण किया था).

3. बदरीनाथ से नज़र आने वाला बर्फ़ से ढंका ऊँचा शिखर नीलकंठ, माता मूर्ति मंदिर (जिन्हें बदरीनाथ भगवान जी की माता के रूप में पूजा जाता है).

4. माणा गाँव, इसे भारत का अंतिम गाँव भी कहा जाता है.

5. वसु धारा (यहाँ अष्ट-वसुओं ने तपस्या की थी) ये जगह माणा से 8 किलोमीटर दूर है. कहते हैं की जिसके ऊपर इसकी बूंदे पड़ जाती हैं उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और वो पापी नहीं होता है.

6. लक्ष्मी वन.

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7. सतोपंथ (स्वर्गारोहिणी) (कहा जाता है कि इसी स्थान से राजा युधिष्ठिर ने सदेह स्वर्ग को प्रस्थान किया था).

8. अलकापुरी (अलकनंदा नदी का उद्गम स्थान. इसे धन के देवता कुबेर का भी निवास स्थान माना जाता है).

9. सरस्वती नदी (पूरे भारत में केवल माणा गाँव में ही यह नदी प्रकट रूप में है).

10. भगवान विष्णु के तप से उनकी जंघा से एक अप्सरा उत्पन्न हुई जो उर्वशी नाम से विख्यात हुई, बदरीनाथ कस्बे के समीप ही बामणी गाँव में उनका मंदिर है.

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तो दोस्तों आपको बद्रीनाथ धाम की ये जानकारी केसी लगी और आप लोग कब का प्लान बना रहे है बद्रीनाथ जाने का. अगर आपको हमारी ये जानकारी अच्छी लगी हो तो इसके बारे में हमे जरूर बताये. साथ ही हमारी इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना ना भूले. धन्यवाद्

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